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एक सुनवाई ……..और लौट आई कंचन की मुस्कान

प्रशासनिक संवेदनशीलता ने बदली दिव्यांग छात्रा की जिन्दगी

*“एक सुनवाई… और लौट आई कंचन की मुस्कान”*

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

*प्रशासनिक संवेदनशीलता ने बदली छात्रा कंचन उइके की जिंदगी*

पांढुर्णा। कभी दिव्यांगता प्रमाण पत्र और आधार कार्ड जैसे जरूरी दस्तावेजों के अभाव में शासकीय योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं से वंचित रहने वाली छात्रा कंचन उइके के लिए अब उम्मीद की नई राह खुल गई है। वर्षों से परेशान कंचन की जिंदगी में वह दिन एक नई शुरुआत बनकर आया, जब उसने अपनी समस्या सीधे कलेक्टर के सामने रखी और प्रशासन ने उसे सिर्फ सुना ही नहीं, बल्कि तुरंत समाधान भी दिया।

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दिनांक 22 जनवरी 2026 को कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ के समक्ष कंचन ने अपनी पीड़ा साझा की। छात्रा ने बताया कि दस्तावेजों की कमी के कारण वह न तो छात्रवृत्ति का लाभ ले पा रही है और न ही शासन की अन्य शैक्षणिक सुविधाओं से जुड़ पा रही है।
कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित विभागों को निर्देश दिए और प्रशासन ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बिना देरी के कार्रवाई शुरू कर दी।

*मेडिकल परीक्षण के बाद मिला 60% दिव्यांगता प्रमाण पत्र*

प्रशासन के निर्देश पर मेडिकल बोर्ड द्वारा कंचन का परीक्षण कराया गया, जिसके बाद उसे 60 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया गया। यह प्रमाण पत्र कंचन के लिए सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि उसके भविष्य की चाबी बनकर सामने आया।

आधार कार्ड भी बना,अब योजनाओं से जुड़ सकी कंचन

इसके साथ ही प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से कंचन का आधार कार्ड भी बनवाया गया, जिससे अब वह शासन की विभिन्न योजनाओं के लिए पात्र हो गई है।
अब कंचन को छात्रवृत्ति योजनाओं और अन्य शैक्षणिक लाभ मिलने लगे हैं। वर्षों से जो सुविधाएं उसके लिए दूर की बात थीं, अब वे उसके जीवन का हिस्सा बन रही हैं।

*संवेदनशील प्रशासन बना सहारा*

कंचन की यह कहानी यह संदेश देती है कि जब प्रशासन सिर्फ नियम नहीं, मानवीय दृष्टिकोण से काम करता है, तो एक जरूरतमंद की जिंदगी बदल सकती है।
यह घटना जिला प्रशासन की तत्परता, संवेदनशीलता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
कंचन की आंखों में अब भविष्य के सपने हैं… क्योंकि प्रशासन ने उसकी परेशानी को कागज नहीं, इंसान समझकर सुना।

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